
फार्मास्युटिकल क्षेत्रक क्या है इसको जानना नहुत जरूरी है.
-
-
फार्मा सेक्टर उस उद्योग को कहते है जो दवाओं और इलाज से जुड़े उत्पादों का अनुसंधान & विकास (Research & Development) विनिर्माण, गुणवत्तापरीक्षण, वितरण और बिक्री करता है।
-
-
-
इसमें जैसे गोलियों, बायोलॉजिक, वैक्सीन, मेडिकल डिवाइसेस और क्लिनिकल ट्रायल्स सामिल होते है।
-
-
-
भारत दुनिया का फार्मास्युटिकल क्षेत्र का सबसे बड़ा वॉल्यूम आधारित जेनरिक दवाओं का प्रदाता है इसकी विश्व में दवा मार्केट में साजेदारी लगभग 5.71% है
-
-
-
1 अक्टूबर से ब्रांडेड या पेटेंट वाली दवाओं के अमेरिका में आयात पर 100% टैरिफ़ लगाया जाएगा.
-
यदि फार्मा कंपनी अमेरिका से अपनी कंपनी का निर्माण इकाई की स्थापना कर लेते है या कर रही है. तो यह टैरिफ़ नहीं लगाया जाएगा।
-
टैरिफ़ का प्रभाव – भारत के लिए बहुत नकारात्मक हो सकता है.
-
इसके 10 मुख्य कारण हो सकते है (स्टेप बाय स्टेप है)
-
-
-
भारत विश्व में दवाओं का निर्यात यूएसए को ही करता है.
-
जेनेरिक दवाओं को बाहर रखा गया है
-
-
लेकिन भारत की जेनेरिक दवाये टैरिफ से बाहर है क्यो कि भारत का निर्यात कम लागत वाला है.
-
-
-
फार्मास्युटिकल क्षेत्र में वित्त वर्ष 2025 में लगभग 10 बिलियन डॉलर मूल्य का निर्यात किया गया जो कुल निर्यात का 35% हिस्सा है.
-
-
-
अमेरिकी अधिकारी “ब्रांडेड फार्मास्युटिकल दवा’’ की परिभाषा को बहुत जटिलता से लागू करते है.
-
भारत की शिपमेंट में समय लगेगा क्यो की अतिरिक्त खर्चा और जाँच बढ़ सकती है.
-
-
-
अमेरिका के बाहर भारत में स्थापित विनिर्माण सयंत्रों की संख्या सबसे ज़्यादा है.
-
भारत की अगर कुछ कंपनी अमेरिका चली गयी तो भारत को नुकसान झेलना पड़ सकता है.
-
-
-
अगर ब्रांडेड दवाओं पर टैरिफ़ की बजह से महगाई बढ़ती है तो इससे जेनेरिक दवाओं की मांग बढ़ सकती है.
-
क्यो की वह थोड़ी सस्ती होती है और भारत को अल्पकालिक मुनाफा मिल सकता है.
-
-
-
भारत की स्थिति के महत्वपूर्ण बिंदु
-
-
-
दुनिया भर में quantity के हिसाब से 3rd no. पर है, और value के हिसाब से 11 वें स्थान पर।
-
-
-
भारत की फ़ार्मायूस्टिकल क्षेत्र में 2030 तक 130 बिलियन डॉलर पहुचने की संभावना है.
-
और 2047 तक 450 बिलियन डॉलर तक पहुचने का अनुमान है।
-
-
-
भारत का कुल निर्यात ड्रग फार्मूलेशंस और बायोलॉजिकल्स का होता है जिसका 75% हिस्सा है।
-
-
-
भारत विश्व में टीका उत्पादन में 60% का योगदान करता है।
-
भारत में फ़ार्मायूस्टिकल क्षेत्र का इतिहास
-
प्राचीन काल में आचार्य चरक जैसे विद्वानों ने योगदान दिया.
-
भारतीय पेटेंट अधिनियम
-
फ़ार्मेंसी अधिनियम (1948)
-
भारत सरकार ने फार्मेंसी व्यवसाय, शिक्षा और दवा बनाना, वितरण और बिक्री को नियमित करने के लिए इस अधिनियम को पारित किया।
-
भारतीय पेटेंट अधिनियम 1970
-
इसमें औषधीय दवायों को बनाने को प्रोत्साहित किया। भारत में जेनेरिक दवायों के उत्पादन में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभायी।
-
उदारीकरण के समय 1990 में भारतीय फार्मा ने विभिन्न देशों में अपनी जगह बनायी।
-
भारत में फार्मास्यूटिकल क्षेत्र का महत्व : 5 महत्वपूर्ण कारण
- वैश्विक स्तर पर 60% वैक्सीन और 20% जेनेरिक दवाये दुनिया को निर्यात करता है भारत इसलिए भारत को ”फ़ार्मेंसी ऑफ़ द वर्ल्ड ” कहते है।
- भारत में सस्ती दवायों की उपलब्धाता है
- फार्मास्युटिकल क्षेत्र भारत की जीडीपी में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है
- भारत में लगातार बायोटेक्नोलॉजी और वैक्सीन पर रिसर्च पर काम हो रहा है
- विदेशी कंपनियां भारत का दवा उद्योग देखते हुये भारत में निवेश करती है
- भारत में फार्मास्यूटिकल मैनुफैक्चरिंग
- विश्व में तीसरा सबसे बड़ा देश है
- भारत में लगभग 3000 फार्मा कंपनी और 8-10 हज़ार मैनुफैक्चरिंग यूनिट्स काम कर रहे है
- मैनुफैक्चरिंग हब – गुड़गांव, मुंबई, बेंगलुरु और हैदराबाद
- डिस्ट्रीब्यूशन
- मैन्युफैक्चरर
- होलशेलर
- रिटेलर
- पेशेंट/ ग्राहक
- फार्मास्युटिकल क्षेत्र की मार्केटिंग अलग है क्यो कि यहाँ मरीज सीधे नहीं लेता है बल्कि डॉक्टर, फार्मासिस्ट और हॉस्पिटल से लेते है.
- मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव के माध्यम से प्रोडक्ट की जानकारी देता है
- हेल्थ चेकअप के कैम्प लगा कर जानता में विश्वास बनाना
- नोट – फ़रमा मार्केटिंग में अब AI Big data or digital tools का भी प्रयोग बढ़ रहा है
- Please check basudevlearning websites
-
#currentaffairs #upsc #pcs #exam #pharmaceutical #basudevlearning #science&technology

weed delivery international fast secure tracking